
कई बार जिंदगी में कुछ लोग ऐसे मिलते हैं जो सिर्फ प्रेरित नहीं करते, बल्कि सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि आखिर हम अपने सपनों के लिए क्या कर रहे हैं।
गीतिका जी की कहानी भी ऐसी ही है। एक ऐसी महिला जिन्होंने सालों तक अपने परिवार, बच्चों और जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी। लेकिन जब बच्चों की जिंदगी सेट हो गई, तब उन्होंने अपने अंदर छिपे कलाकार को फिर से जिंदा किया।
आज गीतिका जी अपने हैंडमेड ब्रांड “Colorful Aura” के जरिए खूबसूरत हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट्स बनाती हैं और हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
perfume—that was our first lesson in style.
गीतिका जी को बचपन से ही ड्रॉइंग, पेंटिंग और क्राफ्ट का बहुत शौक था। स्कूल में उनकी आर्ट टीचर हमेशा उनकी तारीफ किया करती थीं। गर्मियों की छुट्टियों में वो पेंटिंग, कढ़ाई, रंगोली और कई पारंपरिक कलाएं सीखती थीं।
लेकिन शादी के बाद जिंदगी बदल गई।
उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश और परिवार की जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाया। उनकी बेटी आज फिनलैंड में PhD कर रही है और बेटा हिंदुस्तानी क्लासिकल म्यूजिक सीख रहा है। बच्चों के सेटल होने के बाद गीतिका जी को लगा कि अब समय है खुद के सपनों को जीने का।

एक दिन जब वो अपने पुराने घर गईं, तो उन्हें वहां पुराने कांसे के थाल पड़े मिले। जहां बाकी लोग कबाड़ देख रहे थे, वहीं गीतिका जी को एक नया आइडिया दिखाई दिया। उन्होंने उन थालों को साफ किया और सबसे पहले भगवान जगन्नाथ की आर्ट बनाई।
लोगों को उनका काम इतना पसंद आया कि वहीं से उनके नए सफर की शुरुआत हो गई।
धीरे-धीरे उन्होंने लिपन आर्ट, मधुबनी पेंटिंग और हैंडमेड डेकोर प्रोडक्ट्स बनाना शुरू किया।
शुरुआत में गीतिका जी ने सिर्फ 2-3 पीस बनाए थे। उन्हें डर था कि शायद कोई खरीदेगा भी नहीं। लेकिन जब उन्होंने छोटे-छोटे एग्जीबिशन और स्टॉल्स में अपने प्रोडक्ट्स लगाए, तो उन्हें उम्मीद से कहीं ज्यादा ऑर्डर्स मिलने लगे।
दीवाली तक उनके पास इतने ऑर्डर्स आ चुके थे कि उन्हें पूरा करना मुश्किल हो गया।
यहीं से उनके अंदर एक नया आत्मविश्वास पैदा हुआ — कि वो भी कुछ बड़ा कर सकती हैं।
गीतिका जी मानती हैं कि किसी भी महिला की सफलता में परिवार का बहुत बड़ा योगदान होता है।
उनके पति, जो Merchant Navy में Captain हैं, हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे। स्टॉल लगाने से लेकर रॉ मटेरियल खरीदने और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने तक, उन्होंने पूरा सहयोग किया।
वहीं उनकी बेटी ने फिनलैंड से उनकी कैटलॉग और ऑनलाइन काम में मदद की।
गीतिका जी खुद कहती हैं कि वो ज्यादा टेक-सेवी नहीं हैं, लेकिन उनके परिवार ने उनकी कमजोरी को कभी रुकावट नहीं बनने दिया।

2024 में गीतिका जी UP International Trade Fair घूमने गई थीं। वहां उनके पति ने उनसे कहा:
“अगले साल यहां visitor बनकर नहीं, seller बनकर आना।”
बस फिर क्या था।
उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया और पूरे एक साल तक लगातार मेहनत की। हजारों हैंडमेड प्रोडक्ट्स अकेले तैयार किए। नई डिजाइन बनाई, नए आइडियाज पर काम किया और खुद को पहले से बेहतर बनाया।
जब उन्होंने UP International Trade Fair में अपना स्टॉल लगाया, तो लोगों का रिस्पॉन्स शानदार रहा। दीवाली सीजन होने की वजह से उनके प्रोडक्ट्स की जबरदस्त बिक्री हुई।
लेकिन सबसे खास पल तब आया जब उन्हें उनके पहले ही प्रयास में “Best Stall Award” से सम्मानित किया गया।
ये सिर्फ एक अवॉर्ड नहीं था, बल्कि इस बात का सबूत था कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती।
गीतिका जी का सबसे खूबसूरत संदेश यही है कि शादी और बच्चों के बाद महिलाओं की जिंदगी खत्म नहीं होती।
कई बार असली पहचान जिम्मेदारियां निभाने के बाद मिलती है।
आज भी वो घर का काम संभालती हैं, लेकिन अब हर सुबह उनके पास एक नया मकसद होता है।
उनकी कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है जिसने कभी अपने सपनों को “बाद में” कहकर रोक दिया था।
क्योंकि सही समय कभी खुद नहीं आता…
उसे बनाना पड़ता है।
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